यह प्रश्न सदियों से मानव मन में उभरता रहा है, जीवन का रास्ता के इस भ्रमपूर्ण सफर में। क्या अकेलापन एक स्थिति है, जो आती और जाती रहती है, या यह हमारी व्यक्तित्व का हिस्सा है? अनेक व्यक्ति अकेलापन को स्वीकार करते हैं, वह अपने लिए उपयोगी समझते हैं, जबकि अन्य लोगों के लिए यह एक भारी बोझ है.